एक ऐसा काम जिसका नाम नहीं था

1990 के किसी व्यक्ति को सोशल-मीडिया मैनेजर का काम समझाने की कोशिश कीजिए। इंटरनेट ने ऐसे कामों को आम बना दिया जिनका तब नाम तक नहीं था। यही इतिहास आज के आशावादी वादे को आकर्षक बनाता है: AI ऐसे रोज़गार बनाएगा जिनकी हम कल्पना नहीं कर सकते। मैं चाहता हूँ कि ऐसा हो, लेकिन इतिहास से मिलती-जुलती कहानी नौकरी का प्रस्ताव नहीं है।

बदलाव से लाभ भी, नुकसान भी

ऑनलाइन खुदरा कारोबार ने नए काम बनाए, लेकिन कुछ दुकानों से ग्राहक भी छीन लिए। ई-कॉमर्स वितरण केंद्रों पर एक अध्ययन में आसपास की पारंपरिक दुकानों की बिक्री और रोज़गार घटे, जबकि स्थानीय दूसरे क्षेत्रों में नौकरियाँ बढ़ीं। दोनों बातें साथ सच हो सकती हैं: नया काम पैदा हुआ और कुछ कामगारों को नुकसान हुआ।

प्रभाव का मतलब छँटनी का अनुमान नहीं

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का अनुमान है कि दुनिया के हर चार में से एक कामगार ऐसा पेशा करता है जिस पर जनरेटिव AI का कुछ प्रभाव पड़ सकता है; 3.3% सबसे अधिक प्रभाव वाली श्रेणी में हैं। इसका अर्थ है कि काम बदल सकता है, यह नहीं कि ये लोग जल्द निकाल दिए जाएँगे। स्टैनफोर्ड के शोधकर्ताओं को AI से जुड़ी व्यापक अर्थव्यवस्था-भर की छँटनी नहीं मिली। फिर भी, उनका अनुमान है कि जून 2026 तक अमेरिका के अत्यधिक प्रभावित पेशों में 22–25 वर्ष के लोगों का रोज़गार संभावित रुझान से लगभग 19% कम था। यह एक प्रवृत्ति का वर्णन है, AI कारण है इसका प्रमाण नहीं; छँटनी बढ़ने से ज़्यादा, कम भर्ती इसका कारण लगती है।

नए दरवाज़े तक कौन पहुँचेगा?

AI ऐसी सेवाएँ और भूमिकाएँ बना सकता है जिनके नाम अभी हमारे पास नहीं हैं, लेकिन हम उनकी संख्या या लाभ पाने वालों की गारंटी नहीं दे सकते। औज़ार सीखें और प्रयोग करें, साथ ही उन लोगों पर ध्यान दें जिनके करियर की पहली सीढ़ियाँ बदल रही हैं। इंटरनेट ने कुछ दरवाज़े खोले, कुछ बंद भी किए। सवाल है कि क्या हम पर्याप्त नए दरवाज़े बनाएँगे और पुराने खोने वाले लोग उन तक पहुँच पाएँगे।